पिछले कई महीनों से भारत में परिवर्तन की एक उत्कट लालसा दिखाई दे रही है | कल तक जो सज्जन अव्यवस्था, भ्रष्टाचार, अन्याय, दूषित लोकतंत्र आदि को नियति मान नेपथ्य में चले गए थे, अचानक वो लामबंद होकर इनके विरुद्ध खुलकर सामने आने लगे हैं | साथ ही इस अव्यवस्था, भ्रष्टाचार, अन्याय, दूषित लोकतंत्र को संचालित करनेवाले भारत के प्रायः सभी राजनीतिज्ञ भी यथास्थिति को बनाए रखने हेतु सज्जनों के खिलाफ आग उगलने लगे हैं | यह शुभ संकेत है | पहले "लोक" एवं "तंत्र" का स्पष्ट ध्रुवीकरण होगा तभी तो निर्णायक युद्ध संभव होगा | इस ध्रुवीकरण का श्रेय प्रप्रथम भारत के लोक, उसके बाद टीम अन्ना.